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REUNION IAS Dear Stu New Batch Political Science (Optional) with India & World by V.K. Tripathi on 11 March 2019 (Monday) (3:30pm-6:00pm) 303 Satija House Mukherjee Nagar 9999421659-58

Reunion Ias Dear Stu. New Batch GS-II (Mains) with I.R. By V.K. Tripathi On 11 MARCH (Monday) (6pm-8:30pm) 303 Satija House Mukherjee Nagar Delhi 9999421659-58

Reunion Ias Dear Stu. Morning Batch Polity (PT)  with Government By V.K. Tripathi On 11 March (Monday) 10:45AM-1:15PM 303, Satija House, Mukherjee Nagar 9999421659-58

Political Science

सिविल सेवा परीक्षा के दृष्टिकोण से राजनीति विज्ञान व्यापक एवम् बहुआयामी प्रासंगिकता रखता है क्योंकि इसके अंतर्गत आनेवाले विभिन्न पहलू जो विभिन्न प्रश्न पत्रा के पहलुओं से संबंध्ति हैं जिसका लाभ प्रतियोगी छात्रों को प्रारम्भिक परीक्षा से साक्षात्कार परीक्षण तक मिलता है। यदि सम्यक् रणनीति बनाकर कुशल मार्गदर्शन में तैयार की जाये तो वर्तमान पाठ्यक्रम में अध्कि से अध्कि अंक लाकर कम से कम समय में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
सभी विषय अपने आप में अनुशासनात्मक रूप से सुदृढ़ होता है लेकिन अंतर अनुशासनात्मक रूप से सभी विषय एक दूसरे से अंतर्संबंध्ति होता है क्योंकि प्रत्येक विषय का सम्बन्ध् परीक्षा के समग्र ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, भौगोलिक परिप्रेक्ष्य, मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, दार्शनिक परिप्रेक्ष्य, अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य तथा आत्मविश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्य आदि से होता है। इन सभी तत्वों को दृष्टिगत रखते हुए विषय का चुनाव व्यवहारिक पहलुओं के आधर पर किया जाय।

राजनीतिक विज्ञान विषय का वैकल्पिक विषय के रूप में लाभ

सामान्य अध्ययन प्प् ;शासन व्यवस्था, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध्द्ध के 250 अंक की तैयारी हो जाती है।
यह निबंध् में पूर्णतया सहायक होती है। अतः 250 अंक के लिए हमें पुनः तैयारी करने की जरूरत नहीं पड़ती और समय की बचत होती है।
लेखन शैली में आपके विचार व्यापक रूप से मजबूत हो जाते हैं क्योंकि किसी भी मुद्दों को आप वैश्विक, राष्ट्रीय, क्षेत्राीय, व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा संवैधनिक रूप से सोचने समझने लगते हैं।
राजनीति विज्ञान का वैकल्पिक विषय के रूप में 500 अंक की तैयारी हो जाती है।
सामान्य अध्ययन-प्ट में किसी घटनाक्रम को संवैधनिक मूल्यों ;संविधनवादद्ध के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण क्षमता को सुदृढ़ करता है साथ ही नैतिक विचारकों पर गहनता आती है।
सामान्य अध्ययन-प् के अंतर्गत आनेवाले उपविषय जो निम्न हैं।
& स्वतंत्राता के पश्चात् देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन।
& उपनिवेशवाद, उपनिवेशवाद की समाप्ति, राजनीति दर्शन शास्त्रा, जैसे-साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि के रूप और समाज पर उनका प्रभाव।
& भारतीय समाज पर भूमण्डलीकरण का प्रभाव।
& सामाजिक सशक्तीकरण, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रावाद और ध्र्म-निरपेक्षता।
इन उपर्युक्त उपविषयों को आप वैकल्पिक विषय राजनीति विज्ञान में अपने उपविषयों के रूप में पढ़ेंगे अतः सामान्य अध्ययन-प् के इन उपविषयों की भी आपको तैयारी हो जाती है।
सामान्य अध्ययन-प्प्प् के अंतर्गत आने वाले उपविषय निम्न हैं
& सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों एवं उनका प्रबंध्न, संगठित अपराध् और आतंकवाद के बीच संबंध्।
इन उपर्युक्त उपविषयों को आप अपने वैकल्पिक विषय राजनीति विज्ञान में वैश्विक मुद्दों के रूप में तैयार करेंगे अतः सामान्य अध्ययन-प्प्प् के रूप में भी यह सहायक सि( होगी।
यदि आप वैश्विक राष्ट्रीय, क्षेत्राीय, सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक स्तर पर तैयार होकर किसी भी मुद्दे को इस स्तर पर सोचने समझने लगते हैं तो निश्चित तौर पर आप साक्षात्कार के लिए तैयार हो जाते हैं।

कक्षा कार्यक्रम ;मुख्य परीक्षाद्ध

सामान्यतः सम्पूर्ण पाठ्यक्रम अध्ययन में 4 से 5 माह का समय लगता है और सप्ताह में 5 से 6 कक्षाएँ चलती हैं। जिसमें 2ः30 से 3ः00 घण्टे की कक्षा होती है।
प्रत्येक टाॅपिक के अंत में टेस्ट का आयोजन किया जाता है तथा उसकी जाँच स्वयं व्याख्याता द्वारा की जाती है और प्रतियोगी को उनकी समस्याओं से व्यक्तिगत रूप से अवगत कराया जाता है, जिससे विद्यार्थियों को मुख्य परीक्षा के प्रति आत्मविश्वास पैदा किया जा सके।
कई बार विद्यार्थियों द्वारा प्रश्नों की प्रकृति को न समझ पाने के कारण उत्तर लेखन स्तरीय नहीं बन पाता अतः इस समस्या के समाधन हेतु व्याख्यान के दौरान प्रश्नों की विभिन्न प्रकृति के साथ उत्तर लेखन पर बल दिया जाता है।
राजनीति विज्ञान का पाठ्यक्रम व्यापक और बहुआयामी होने से समग्र रूप से किताबों में उपलब्ध् नहीं हो पाता इसलिए प्रत्येक टाॅपिक पर समग्र विश्लेषणात्मक नोट्स कक्षा प्रारम्भ होने के पहले या टाॅपिक समाप्त के तुरंत बाद उपलब्ध् कराया जाता है।
राजनीति विज्ञान के समग्र विषय वस्तु पर विगत वर्षों में संघ लोक सेवा आयोग तथा प्रादेशिक लोक सेवा आयोगों ;यूपी, बिहार, एम.पी., राजस्थान, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड आदिद्ध द्वारा पूछे गये प्रश्नों को समेकित रूप से प्रश्नकोष के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।
प्रतियोगी छात्रों द्वारा आत्मविश्वास निरंतर बनाए रखने के लिए कक्षा के दौरान या कक्षा के बाहर व्यक्तिगत रूप से समस्या का समाधन किया जाता है।
विगत वर्षों में पूछे गए तथा संभावित प्रश्नों के आदर्श उत्तर ;डवकमस ।देूमतद्ध भी पाठ्यक्रम के टाॅपिक के अनुसार उपलब्ध् कराया जाता है।
राजनीति विज्ञान के विद्यार्थियों को साक्षात्कार हेतु व्याख्याता द्वारा व्यक्तिगत मार्गदर्शन उपलब्ध् करया जाता ळें

राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध्
मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम
प्रश्न पत्रा-1 ;250 अंकद्ध
राजनैतिक सि(ांत एवं भारतीय राजनीति

1- राजनैतिक सि(ांत: अर्थ एवं उपागम
2- राज्य के सि(ांत: उदारवादी, नवउदारवादी, माक्र्सवादी, बहुलवादी, पश्च-उपनिवेशोत्तर एवं नारीवाद।
3- न्याय: राॅल्स के न्याय के सि(ांत के विशेष संदर्भ में न्याय के संप्रत्यय एवं इसके समुदायवादी समालोचक।
4- समानता: सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक, समानता एवं स्वतंत्राता के बीच संबंधऋ सकारात्मक कार्य।
5- अधिकार: अर्थ एवं सि(ांत: विभिन्न प्रकार के अधिकारऋ मानवाधिकार की संकल्पना।
6- लोकतंत्रा: क्लासिकी एवं समकालीन सि(ांत: लोकतंत्रा के विभिन्न माॅडल, प्रतिनिधि, सहभागी एवं विमर्शी।
7- शक्ति, प्राधान्य, विचारधारा एवं वैधता की संकल्पना।
8- राजनैतिक विचारधाराएँ: उदारवाद, समाजवाद, माक्र्सवाद, पफासीवाद, गाँधीवाद एवं नारीवाद।
9- भारतीय राजनैतिक चिंतनः धर्मशास्त्रा, अर्थशास्त्रा एवं बौ( परंपराएं, सर सैयद अहमद खान, श्री अरविंद, एम.के. गाँधी, बी. आर. अम्बेडकर, एम.एन. राॅय।
10- पाश्चात्य राजनैतिक चिंतन: प्लेटो, अरस्तु, मैकियावेली, हाॅब्स, लाॅक, जाॅन एस. मिल, माक्र्स, ग्रामशी, हन्ना आरेण्ट।

भारतीय शासन एवं राजनीति

भारतीय राष्ट्रवाद:
कद्ध भारत के स्वाधीनता संग्राम की राजनैतिक कार्यनीतियां: संविधानवाद से जन सत्याग्रह, असहयोग, सविनय अवज्ञा एवं भारत छोड़ों, उग्रवादी एवं क्रान्तिकारी आन्दोलन, किसान एवं कामगार आन्दोलन।
;खद्ध भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के परिप्रेक्ष्य: उदारवादी, समाजवादी एवं माक्र्सवादी, उग्रमानवतावादी एवं दलित।
2- भारत के संविधान का निर्माण: ब्रिटिश शासन की विरासतऋ विभिन्न सामाजिक एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य।
3- भारत के संविधान की प्रमुख विशेषताएं: प्रस्तावना, मौलिक अधिकार तथा कत्र्तव्य, नीति निर्देशक सि(ांत, संसदीय प्रणाली एवं संशोधन प्रक्रियाऋ न्यायिक पुनर्विलोकन एवं मूल संरचना सि(ांत।
4- क. संघ सरकार के प्रधान अंग: कार्यपालिका, विधायिका एवं सर्वोच्च न्यायालय की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्यप्रणाली।
ख. राज्य सरकार के प्रधान अंग: कार्यपालिका, विधायिका एवं उच्च न्यायालयों की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्य प्रणाली।
5- आधारिक लोकतंत्रा: पंचायती राज एवं नगर शासनऋ 73वें एवं 74वें संशोधनों का महत्वऋ आधारिक आन्दोलन।
6- सांविधिक संस्थाएं/आयोग: निर्वाचन आयोग, नियंत्राक एवं महालेखा परीक्षक, वित्त आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग।
7- संघराज्य प(ति: सांविधानिक उपबंध, केन्द्र राज्य संबंधों का बदलता स्वरूप, एकीकरणवादी प्रवृत्तियां एवं क्षेत्राीय आकाक्षाएंऋ अंतर-राज्य विवाद।
8- योजना एवं आर्थिक विकास: नेहरूवादी एवं गाँधीवादी परिप्रेक्ष्य, योजना की भूमिका एवं निजी क्षेत्रा, हरित क्रान्ति, भूमि सुधार एवं कृषि संबंध, उदारीकरण एवं आर्थिक सुधार।
9- भारतीय राजनीति मंे जाति, धर्म एवं नृजातीयता।
10- दल प्रणाली: राष्ट्रीय एवं क्षेत्राीय राजनैतिक दल, दलों के वैचारिक एवं सामाजिक आधार, बहुदलीय राजनीति के स्वरूपऋ दबाव समूह, निर्वाचक आचरण की प्रवृत्तियां, विधायकों के बदलते सामाजिक-आर्थिक स्वरूप।
11- सामाजिक आन्दोलन: नागरिक स्वतंत्राताएं एवं मानवाधिकार आन्दोलन, महिला आन्दोलन, पर्यावरण आन्दोलन।

प्रश्न पत्रा-2 ;250 अंकद्ध
तुलनात्मक राजनैतिक विश्लेषण एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति

1- तुलनात्मक राजनीति: स्वरूप एवं प्रमुख उपागमऋ राजनैतिक अर्थव्यवस्था एवं राजनैतिक समाजशास्त्राीय परिप्रेेक्ष्य, तुलनात्मक प्रक्रिया की सीमाएं।
2- तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राज्यः पूंजीवादी एवं समाजवादी अर्थव्यवस्थाओं में राज्य के बदलते स्वरूप एवं उनकी विशेषताएं तथा उन्नत औद्योगिक एवं विकासशील समाज।
3- राजनैतिक प्रतिनिधान ;त्मचतमेमदंजपवदद्ध एवं सहभागिता: उन्नत औद्योगिक एवं विकासशील समाजों में राजनैतिक दल, दबाव समूह एवं सामाजिक आन्दोलन।
4- भूमंडलीकरण: विकसित एवं विकासशील समाजों से प्राप्त अनुक्रियाएं।
5- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन के उपागम आदर्शवादी, यथार्थवादी, माक्र्सवादी, प्रकार्यवादी एवं प्रणाली सि(ांत।
6- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आधारभूत संकल्पनाएं: राष्ट्रीय हित, सुरक्षा एवं शक्ति, शक्ति संतुुलन एवं प्रतिरोध, पर-राष्ट्रीयकर्ता एवं सामूहिक सुरक्षा, विश्व पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एवं भूमंडलीकरण।
7- बदलती अंतर्राष्ट्रीय राजनीति व्यवस्था:
;कद्ध महाशक्तियों का उदयः कार्यनीतिक एवं वैचारिक द्विध्रुवीयता, शस्त्राीकरण की होड़ एवं शीत यु(, नाभिकीय खतरा।
;खद्ध गुटनिरपेक्ष आन्दोलन: उद्देश्य एवं उपलब्ध्यिां।
;गद्ध सोवियत संघ का विघटन: एकध्ु्रवीय विश्व एवं अमेरिकी प्रभुत्व, समकालीन विश्व में गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की प्रासंगिकता।
8- अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का उद्भव: ब्रेटनवुड से विश्व व्यापार संगठन तक, समाजवादी अर्थव्यवस्थाएं तथा पारस्परिक आर्थिक सहायता परिषद्, नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की तृतीय विश्व की मांग, विश्व अर्थव्यवस्था का भूमंडलीकरण।
9- संयुक्त राष्ट्र: विचारित भूमिका एवं वास्तविक लेखा-जोखाऋ विशेषीकृत संयुक्त राष्ट्र अभिकरण - लक्ष्य एवं कार्यकरण, संयुक्त राष्ट्र सुधारों की आवश्यकता।
10- विश्व राजनीति का क्षेत्राीयकरण: म्न्ए ।ैम्।छए ।च्म्ब्ए ै।।त्ब्ए छ।थ्ज्।
11- समकालीन वैश्विक सरोकार: लोकतंत्रा, मानवाधिकार, पर्यावरण, लिंग न्याय, आतंकवाद, नाभिकीय प्रसार।

भारत तथा विश्व

1- भारत की विदेश नीति: विदेश नीति के निर्धारकऋ नीति निर्माण की संस्थाएंऋ निरंतरता एवं परिवर्तन।
2- गुट निरपेक्षता आन्दोलन को भारत का योगदान: विभिन्न चरण, वर्तमान भूमिका।
3- भारत और दक्षिण एशिया
क. क्षेत्राीय सहयोग: ै।।त्ब् - पिछले निष्पादन एवं भावी प्रत्याशाएं।
ख. दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्रा के रूप में।
ग. भारत की पूर्व अभिमुखन नीति।
घ. क्षेत्राीय सहयोग की बाधाएं: नदी जल विवादऋ अवैध सीमा पार उत्प्रवासनऋ नृजातीय द्वंद्व एवं उपप्लव ;पदेनतहमदबपमेद्ध ऋ सीमा विवाद।
4- भारत एवं वैश्विक दक्षिण: अÚीका एवं लातीनी अमेरिका के साथ संबंध, छप्म्व् एवं ॅज्व् वार्ताओं के लिए आवश्यक नेतृत्व की भूमिका।
5- भारत एवं वैश्विक शक्ति केन्द्र: संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप संघ, जापान, चीन और रूस।
6- भारत एवं संयुक्त राष्ट्र प्रणाली: सयुक्त राष्ट्र शान्ति अनुरक्षण में भूमिकाऋ सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता की मांग।
7- भारत एवं नाभिकीय प्रश्न: बदलते प्रत्यक्षण ;च्मतबमचजपवदद्ध एवं नीति।
8- भारतीय विदेश नीति में हाल के विकास: अपफगानिस्तान में हाल के संकट पर भारत की स्थिति, इराक एवं पश्चिम एशिया, यू.एस. एवं इजराइल के साथ बढ़ते संबंध, नई विश्व व्यवस्था की दृष्टि।

मुख्य परीक्षा के लिए अनुशंसित पुस्तकें

राजनीति विज्ञान वैकल्पिक विषय के प्रत्येक प्रश्न पत्रा के लिए रीयूनियन संस्थान द्वारा मुख्य परीक्षा पठ्नीय सामग्री उपलब्ध् कराई जाती है।

प्रथम प्रश्न पत्रा के लिए

1- प्रथम प्रश्न पत्रा के लिए
2- भारतीय राजनीतिक विचारक - बी.आर.पुरोहित
3- राजनीतिक सि(ांत - जे.सी. जोहरी
4- भारतीय शासन एवं राजनीति - सुभाष कश्यप, डाॅ. रूपा मंगलानी
5- राष्ट्रीय स्वतंत्राता आंदोलन - बिपिन चन्द्र

द्वितीय प्रश्न पत्रा के लिए

6- समकालीन अंतर्राष्ट्रीय संबंध् - आर.सी.बरमानी
7- अंतर्राष्ट्रीय/क्षेत्राीय संगठन - एम.पी.राॅय
8- अंतर्राष्ट्रीय संबंध् - बेलिस स्मिथ ओवेन ;आॅक्सपफोर्ड प्रेसद्ध
9- भारतीय विदेश नीति - आर.एस.यादव

अन्य सहायक

10- वल्र्ड पफोकस, इंडिया टुडे, द हिन्दू।

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